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स्टील की बढ़ती कीमतों से कंस्ट्रक्शन, ऑटो और कंज्यूमर गुड्स पर असर पड़ेगा

मूल्य वृद्धि के खेल का व्यापार सहित देश के अन्य क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
– कंस्ट्रक्शन, ऑटो और कंज्यूमर गुड्स इंडस्ट्रीज पर प्रतिकूल असर

मुंबई कोरोना काल में अब स्टील की कीमत भी बढ़ेगी। निर्माताओं ने हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) की कीमत में 4,000 रुपये प्रति टन और कोल्ड रोल्ड कॉइल (सीआरसी) की कीमत में 4,900 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी की है। अब मकान बनाने का खर्चा बढ़ेगा। रियल एस्टेट सेक्टर में चिंताएं बढ़ेंगी। वाहन निर्माता कार, ट्रैक्टर आदि के दाम बढ़ाने को मजबूर होंगे। वहीं, उपभोक्ता सामान महंगा होगा। कीमत वृद्धि के इस खेल का घरेलू कारोबार समेत अन्य क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

बाजार पर निर्भर
कंपनियों का कहना है कि दुनिया में स्टील की भारी मांग है। कीमतों में यह बढ़ोतरी बाजार के रुख पर निर्भर करती है। लौह अयस्क भी महंगा हो गया है। उत्पादन लागत बढ़ी है। अगर कीमत नहीं बढ़ाई गई तो निर्माताओं को नुकसान होगा। घरेलू बाजार में मांग कमजोर है। विदेशों में स्टील की कीमत रुपये जितनी अधिक है। निर्माता निर्यात बढ़ाकर अवसर का लाभ उठा रहे हैं।





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